गुटनिरपेक्ष आंदोलन गुटनिरपेक्ष आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि औपनिवेशिक शासन के अंत का शीत युद्ध के दौरान तीसरी दुनिया के देशों के मध्य एकता की आवश्यकता के आधार पर निर्मित हो गया था। यह आंदोलन वैश्विक शांति और सुरक्षा के संरक्षण की मांग पर आधारित है इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध तीसरी दुनिया के देशों द्वारा संचालित राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ही निर्मित हो गई थी, हालांकि इसका आधार 1947 में नई दिल्ली में आयोजित एशिया अफ्रीका देश के सम्मेलन में निर्मित हुआ। वहीं 1955 में आयोजित बांडुंग सम्मेलन में इसके मार्गदर्शक सिद्धांत निर्मित हुए थे। बांडुंग सम्मेलन में 29 एशियाई अफ्रीकी देशों की सहभागिता देखी गई। इस सम्मेलन में 10 सिद्धांतों की घोषणा की गई जो निम्नलिखित है- • संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और उद्देश्यों व सिद्धांतों तथा मानवाधिकार के प्रति सम्मान, • सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान • सभी राष्ट्रों तथा नस्लों के मध्य समानता ...
भारतीय विदेशनीति का विकास भारतीय विदेशनीति के विभिन्न चरण वर्तमान भारतीय विदेशनीति भारतीय विदेशनीति में निरंतरता और परिवर्तन के तत्व भारतीय विदेशनीति का विकास ऐसे दौर में हुआ जब भारत के सामने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अनेक संकट विद्यमान थे। साथ ही आंतरिक स्तर पर राष्ट्र के एकीकरण की भी चुनौती थी। देश में सामाजिक आर्थिक असमानता व्यापक स्तर पर थी। ऐसे में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास को प्रेरित करने वाली विदेश नीति आवश्यक थी। साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का इच्छुक था। इसी संदर्भ में भारत की विदेश नीति का विकास हुआ। प्रथम चरण(1947-1967) इस दौरान भारतीय विदेशनीति अधिक आदर्शवादी थी,जिसका उद्देश्य वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर शांति,सहयोग और समृद्धि को बढ़ावा देना था। इस दौरान भारत स्वयं को एशियाई शक्ति और तीसरी दुनिया के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने का इच्छुक भी था। भारत अपनी छवि एक जिम्मेदार देश के रूप में निर्मित करना चाहता था ना की विस्तारवादी देश के रूप में,इसलिए भारत द्वारा पंचशील और गुटनिरपेक्ष विद...